केरल में हिंसा का दौर जारी

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कोझिकोड:केरल में जारी राजनीतिक हिंसा के निकट भविष्य में थमने के आसार नहीं हैं। जहां माकपा अपने गढ़ में आरएसएस की घुसपैठ बर्दास्त करने के लिए कतई तैयार नहीं दिख रही है, वहीं संघ परिवार भी पीछे हटने के लिए राजी नहीं है। वैसे संघ परिवार को भरोसा है कि लड़ाई भले ही लंबी हो, लेकिन जीत आखिर उसकी ही होगी। पिछले कुछ सालों में संघ परिवार के बढ़े जनाधार से उसके भरोसे को बल मिलता है। कन्नूर विश्र्वविद्यालय के विधि विभाग की प्रमुख कविता बालकृष्णन भी मानती हैं कि कार्यकर्ताओं की हत्याकर किसी पार्टी की बढ़त को रोका नहीं जा सकता है।

माकपा और संघ परिवार की सबसे बड़ी ताकत विचारधारा से जुड़े उनके कार्यकर्ता हैं। कार्यकर्ताओं की जानलेवा हमले और उनकी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने का उद्देश्य उनके मनोबल को तोड़ना होता है। लेकिन सच्चाई यह भी है कि 300 से अधिक स्वयंसेवकों की हत्या हजारों के अपाहिज बना दिये जाने के बावजूद केरल में संघ परिवार का मनोबल नहीं तोड़ा जा सका है। यहां तक कि माकपा के गढ़ माने जाने वाले कन्नूर और पयीनूर में भी संघ के शाखाओं की संख्या बढ़ती जा रही है।

पिछले दो दशक में यहां संघ की शाखाओं की संख्या में चार गुना से अधिक बढ़ोतरी हुई है। 1990 से 2000 के दौरान जहां कन्नूर जिले में संघ की महज 100 शाखाएं लगती हैं। वहीं इन शाखाओं की संख्या अब 400 तक पहुंच गई हैं। यानी 400 जगहों पर संघ के 15-20 स्वयंसेवक रोज इक्ट्ठा होते हैं। संघ के प्रांत कार्यकारी से सदस्य वल्सन तल्लाइनकरी का दावा है कुछ शाखाओं पर स्वयंसेवकों की संख्या 100 तक पहुंच गई है। यहीं नहीं, संघ हिंसा के शिकार स्वयंसेवकों का मनोबल बनाए रखने में सफल रही है।

मौत के मुंह के बाहर आने वाला ट्रक ड्राइवर गणेशन अब किसी तरह चल-फिर पाता है। वह आज भी संघ से जुडा है। इसी तरह 2002 में उत्तमन की हत्या कर भी माकपा उसके बेटे रमिथ को संघ से दूर करने में सफल नहीं हो सकी। अंतत 2016 में उसकी भी हत्या कर दी गई। लेकिन पति और इकलौते बेटे को गंवा चुकी नारायणी अब भी संघ से जुड़ी है और माकपा से दिले से नफरत करती है।

इसी तरह पयीनूर के आरएसएस जिला कार्यवाह पी राजेश कुमार के घर में तोड़फोड़ आग लगा दी गई। घर के बाहर खड़ी गाडि़यों को भी जला दिया गया। लेकिन तीन हफ्ते बाद रक्षाबंधन के अवसर पर राजेश कुमार संघ कार्यालय में कार्यक्त्रम को पहले की तरह ही संचालित कर रहे थे। राजनीतिक वर्चस्व हासिल करने की लंबी लड़ाई के लिए संघ परिवार अब पूरी रणनीति के साथ मैदान में है। वह हिंसा के शिकार हुए कार्यकर्ताओं के परिवार के लिए आर्थिक मदद से लेकर कानून लड़ाई की व्यवस्था करता है। जुलाई में जिन 12 घरों में तोड़फोड़ की गई थी, संघ परिवार उन्हें बनाने में भी योगदान कर रहा है।

संघ के कार्यकर्ता यह सुनिश्चत करते हैं कि हमले के आरोपी माकपा कार्यकर्ताओं के खिलाफ पुलिस में एफआइआर दर्ज हो और उनके खिलाफ पुलिस की जांच निष्पक्ष हो। इसके साथ ही अच्छे वकीलों के साथ अदालत में केस को पूरी मजबूती से लड़ा जाता है। केरल में राजनीतिक हिंसा लेकर संघ के वरिष्ठ नेता दत्तात्रेय हसबोले के दिल्ली में प्रेस कांफ्रेंस या फिर हिंसा में मारे गए राजेश के घर पर वित्तमंत्री अरुण जेटली के दौरा आरएसएस की रणनीति का हिस्सा है।