तैराकों के खाने के बर्तनों में है कॉकरोच का राज, क्या ऐसे आएंगे मेडल?

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नई दिल्ली:1982 एशियन गेम्स और 2010 कॉमनवेल्थ गेम्स के गवाह रहे श्यामा प्रसाद मुखर्जी तरणताल कांप्लेक्स (एसपीएमसी) की हालत बेहद खराब है। तरणताल के पानी में क्लोरीन की दुर्गंध अधिक होने के कारण यहां प्रशिक्षण ले रहे छह प्रशिक्षु बेहोश हो चुके हैं और यहां के स्टोर व रसोईघर में कॉकरोचों व चूहों का कब्जा है।
प्रशिक्षुओं के माता-पिता की शिकायत पर इस माह की चार तारीख को ही भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के महानिदेशक इंजेटी श्रीनिवास के निर्देश पर जांच समिति ने यहां का दौरा किया था। बच्चों ने जांच समिति को किचन में दौड़ते कॉकरोचों, चूहों और तरणताल में क्लोरीन की दरुगध से बेहोश होने के बारे में बताया था। यही नहीं क्लोरीन की मात्र अधिक होने के कारण प्रशिक्षुओं को सांस लेने में तकलीफ होती है और चक्कर आते हैं।
जांच समिति के दौरे के बावजूद शुक्रवार तक स्थिति में कोई सुधार नहीं हुआ था। वहां चारों तरफ फैली गंदगी के बीच सैकड़ों की संख्या में कॉकरोच रसोईघर में बैकस्ट्रोक, ब्रेस्टस्ट्रोक, फ्रीस्टाइल और बटरफ्लाई तैराकी करते नजर आ रहे थे। खाने के बर्तनों में भी कॉकरोचों का ही कब्जा था। इस समय एसपीएमसी में 28 प्रशिक्षु (बालक/बालिकाएं) तैराकी सीख रहे हैं जो यहां की डॉरमेट्री में रहते हैं।
हिंदी अखबार दैनिक जागरण के पास मौजूद फोटो और वीडियो से साफ पता चलता है प्रशिक्षुओं के लिए जिस रसोईघर में खाना बनाया जाता है वहां कॉकरोचों की ऐशगाह है। यहां एक कोने में सड़े हुए आलू पड़े हैं जिन्हें सब्जी के जरिये होनहारों को परोसा जाता है। इससे यह भी पता चलता है कि ओलंपिक और अन्य वैश्विक प्रतियोगिताओं में भारत की हालत पतली क्यों रहती है। जब एसपीएमसी के प्रशासक और साई के सहायक निदेशक प्रवीण कक्कड़ से इस बारे में पूछा गया तो वह सकते में आ गए। उन्होंने कहा कि मुङो कुछ नहीं कहना है। साई के एक अधिकारी ने जांच समिति के दौरे की पुष्टि करते हुए कार्रवाई का आश्वासन दिया।