बर्थडे स्पेशल: यही था अमिताभ बच्चन का पहला अपना घर

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आज बॉलिवुड के शहंशाह अमिताभ बच्चन का 75वां जन्मदिन है। इस खास मौके पर बात करते हैं उनके सबसे पहले घर की। ‘सोपान’ के लिए आप कह सकते हैं कि यह ‘प्रतीक्षा’ या ‘जलसा’ की तरह से फेमस नहीं है। मगर, हरिवंश राय बच्चन और तेजी बच्चन के लिए इस घर का अलग मतलब था, क्योंकि ये उनका या कहें कि बच्चन कुनबे का पहला अपना घर था। इसे दोनों ने बड़ी ही मेहनत और हसरत से बनवाया था दिल्ली के गुलमोहर पार्क में।
ये 1970 के आसापस की बात है। अमिताभ बच्चन फिल्मों में स्थापित होने के लिए संघर्ष कर रहे थे। बच्चन दंपती ने सोपान को बनवाने के बाद यहां रहना शुरू कर दिया था। अमिताभ बच्चन भी इधर लगातार आते-जाते रहते थे। दिल्ली में होते तो इसमें ही ठहरते। माता-पिता के साथ वक्त गुजारते।
सोपान में नियमित रूप से कविता पाठ और सामयिक सवालों पर गोष्ठियों के आयोजन लगातार जारी रहते थे। बच्चन जी दूसरे साहित्यकारों की गोष्ठियों में भाग भी लेते थे। बच्चन जी और तेजी जी गजब के मेजबान थे। वे सोपान में आने वालों के लिए बढ़िया नाश्ते या भोजन की व्यवस्था करते। सोपान में होने वाली गोष्ठियों में बच्चन जी भी अपनी रचनाएं पढ़ते थे। उनसे जो रचनाएं पढ़ने का आग्रह होता था, उसे वे तुरंत पूरा करते थे।
सोपान में डॉ. धर्मवीर भारती, कमलेश्वर, कन्हैया लाल नंदन, अक्षय कुमार जैन, विजेन्द्र स्नातक जैसे नामवर साहित्यकार-पत्रकार नियमित रूप से बैठकी करते थे। सच तो यह है कि सोपान एक दौर में राजधानी में हिन्दी प्रेमियों का तीर्थस्थल बन गया था। इसमें लगातार महफिलें चलती थीं। ड्रॉइंग रूम में बैठकों के दौर चलते थे। कहते हैं कि बच्चन जी से उस दौर में ‘जीवन की आपा-धापी में कब वक्त मिला, कुछ देर कहीं पर बैठ कभी यह सोच सकूं, जो किया, कहा, माना उसमें क्या बुरा भला… हर एक लगा है अपनी दे-ले में’ को सुनाने का खासतौर पर आग्रह रहता था।
बच्चन जी शाम को अवश्य गुलमोहर पार्क क्लब में मित्रों के साथ बैठने के लिए पहुंचते थे। दोनों पति-पत्नी ‘डॉन’ की अपार सफलता तक सोपान में ही रहे। अमिताभ-जया बच्चन दिवाली और दूसरे पर्वों पर यहां जरूर आते। उनके छोटे बेटे अजिताभ भी दिवाली पर यहीं होते थे। एक बार दिवाली पर अनार जलाते हुए अमिताभ का हाथ भी जल गया था। दिवाली बहुत भव्य तरीके से बच्चन परिवार सोपान में मनाता था। ‘डॉन’ के बाद अमिताभ बच्चन माता-पिता को मुंबई ले गए। तब तक वो सुपर स्टार बन चुके थे। इसके बाद गुलमोहर पार्क के लोगों को भी याद नहीं आता कि कभी वे फिर लंबे वक्त के लिए गुलमोहर पार्क वाले घर में लौटे।
अब तो सोपान का केयरटेकर इसकी देखरेख करता है। किसी ने लंबे समय से अमिताभ या उनके परिवार के किसी सदस्य को यहां पर देखा भी नहीं है। कारण साफ है कि अब परिवार मुंबई में ही बस गया है। गुलमोहर पार्क में तेजी जी को प्लॉट इसलिए मिला था, क्योंकि वे आकाशवाणी में काम करती थीं। गुलमोहर पार्क तो पत्रकारों की कॉलोनी बन रही थी। गुलमोहर पार्क सोसायटी को जब पर्याप्त मेंबर नहीं मिले तो उन्होंने मिलते-जुलते पेशों से जुड़े लोगों को इसका सदस्य बनाना शुरू कर दिया। इस वजह से तेजी जी को इसकी मेंबरशिप मिल गई। गुलमोहर पार्क के पुराने लोगों को याद है जब बच्चन जी यह सुनिश्चित करते थे कि अमिताभ की हर फिल्म यहां के उनके मित्र भी देख लें। वे सबको फिल्मों के कसेट देते थे। कहते थे, ‘अमिताभ ने इस फिल्म में बेजोड़ काम करके दिखा दिया है। आप भी इस फिल्म को देखिए।’
अब कैसा है सोपान? सोपान बढ़िया स्थिति में है। पर यहां पर रहता कोई नहीं है। जाहिर है, अब गुजरा दौर तो सोपान में नहीं लौटेगा। अब उधर कविता पाठ भी नहीं होता। अच्छी बात यह भी है कि बच्चन परिवार ने सोपान को अपने स्वामित्व में ही रखा हुआ है। करीब 200 वर्ग गज में बने सोपान का बाजार मूल्य 25 करोड़ रुपये से कम नहीं होगा। इधर एक फ्लोर का रेंट भी करीब एक लाख रुपये महीने से कम नहीं होता। इसके बावजूद सोपान को बच्चन परिवार ने पूरी तरह से अपने पास रखा हुआ है।
हां, अब बी-8 गुलमोहर पार्क को यहां के लोग अमिताभ बच्चन के घर के रूप में जानते हैं। हरिवंश जी और तेजी जी की पीढ़ी तो अब लगातार घट ही रही है। पहले बी-8 बच्चन-तेजी के घर के रूप में जाना जाता था।