आरएसएस ने बताया, क्यों शाखाओं में नहीं आती महिलाएं

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नई दिल्ली। आरएसएस की शाखाओं के सुबह 6 बजे ही लगने और कठिन व्यायाम के चलते महिलाओं की इसमें भागीदारी नहीं होती। सुबह जल्दी उठकर शाखा जाना और वहां कठिन व्यायाम करना महिलाओं के लिए सहज नहीं है। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के पदाधिकारियों ने राहुल गांधी की ओर से संघ में महिलाओं की भागीदारी न होने के आरोप के जवाब में यह बात कही। गुजरात में हाल ही में महिलाओं की एक सभा में राहुल गांधी ने कहा था कि क्या आपने कभी संघ की शाखाओं में शॉर्ट्स पहने हुई महिलाओं को देखा है। इस सवाल के साथ राहुल ने संघ पर महिलाओं की उपेक्षा करने का आरोप लगाया था।
राहुल के बयान पर टिप्पणी करते हुए सीनियर आरएसएस लीडर मनमोहन वैद्य ने कहा, ‘यह ऐसा ही है कि कोई पुरुष हॉकी के मैच में पहुंच जाए और वहां महिला हॉकी खिलाड़ियों की तलाश करे।’ वैद्य ने कहा कि आरएसएएस शाखाओं पर पुरुषों के साथ काम करता है और उनके जरिए परिवारों से भी जुड़ता है। वैद्य ने स्पष्ट किया कि आरएसएस के अन्य सभी संगठनों में महिलाओं की बराबर की भागीदारी है।
सीनियर आरएसएस लीडर ने कहा कि महिलाओं की भागीदारी पर हम अकसर बात करते हैं। लेकिन, शारीरिक खेलों और शाखाओं की टाइमिंग के चलते महिलाओं के लिए शाखा में शामिल होना संभव नहीं है। ऐसे में महिलाओं की भागीदारी के लिए संघ का आनुषांगिक संगठन राष्ट्र सेविका समिति काम करता है। सेविका समिति की ओर से प्रतिदिन दोपहर में शाखाओं का आयोजन होता है और कुछ स्थानों में सप्ताह में तीन दिन शाखा लगती है।
एक साथ नहीं कठिन खेल नहीं खेल सकते महिला-पुरुष
एक सीनियर संघ नेता ने कहा, ‘शाखा में खेलों के जरिए राष्ट्र निर्माण का कार्य होता है। इनकी रचना ऐसी है कि शाखाओं में पुरुष और सेविका समिति में महिलाएं की अलग-अलग हिस्सेदारी होती है।’ एक लीडर ने खेलों की जानकारी देते हुए कहा कि शाखा में एक खेल होता है ‘किला किसका है’। यह खेल लगभग हर दिन होता है, जिसे खेलते हुए काफी जोर-आजमाइश की जाती है। यह महिला एवं पुरुष की मिली-जुली शाखा में संभव नहीं है।
सेविका समिति की एक सीनियर पदाधिकारी ने कहा, ‘हम मिडल और लोअर मिडल क्लास की महिलाओं के बीच काम करते हैं। इन महिलाओं पर घर की जिम्मेदारी होती है, उसके बाद भी वह शाखा से जुड़ती हैं। ऐसे में यह कहना गलत होगा कि महिलाएं अपनी पारिवारिक जिम्मेदारियों को छोड़ दें और सुबह के वक्त शाखा में आएं।’ यही नहीं करीब दो साल पहले आरएसएस ने पुणे जैसे शहरों में फैमिली शाखा का कंसेप्ट शुरू किया। संघ का मानना था कि इससे उसकी ‘सिर्फ पुरुषों के लिए’ वाली छवि बदलेगी।
महिलाओं को जोड़ने के लिए फैमिली शाखाएं
फैमिली शाखाएं अमेरिका और यूरोप कई जगहों पर लगती हैं। इन्हें 2013 में राम माधव (फिलहाल बीजेपी महासचिव) और सहसरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले द्वारा शुरू किया गया था। एक संघ नेता ने कहा कि ये साप्ताहिक शाखाएं होती हैं, जिनमें योग, खेल और बौद्धिक चर्चाएं होती हैं। हालांकि संघ के नेताओं ने यह स्वीकार किया कि पदाधिकारियों में महिलाएं नहीं हैं, लेकिन संगठन की शीर्ष निर्णयकारी संस्था प्रतिनिधि सभा में महिलाओं की भागीदारी लगातार बढ़ रही है।