रोहिंग्या मुसलमान: सुप्रीम कोर्ट में सरकार के रुख का विरोध करेगा मानवाधिकार आयोग

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नई दिल्‍ली:राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) भारत में अवैध रूप से रह रहे 40 हजार रोहिंग्या मुस्लिम शरणार्थियों को वापस म्यांमार भेजने की केंद्र सरकार की योजना का विरोध करेगा। केंद्र सरकार इस मामले में एक हलफनामा दायर करके सुप्रीम कोर्ट को अपने रुख की जानकारी देगी। आयोग अदालत में ‘मानवता के आधार’ पर रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने का विरोध करेगा। आयोग यह भी दलील दे सकता है कि अगर इन्हें वापस भेजा गया तो म्यांमार में इनकी जान को खतरा हो सकता है।
रोहिंग्या मुसलमानों को वापस भेजने के मामले पर केंद्र सरकार की ओर से केंद्रीय गृह मंत्रालय हलफनामा दायर करने ही वाला है। उनकी भारत में मौजूदगी को ‘गैरकानूनी, सुरक्षा के लिए खतरा और भारत के संसाधनों पर बोझ’ बताया गया है। एनएचआरसी के चेयरपर्सन और सुप्रीम कोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस एचएल दत्तू ने हमारे सहयोगी अखबार द टाइम्स ऑफ इंडिया से बातचीत में बताया, ‘हम मानवीय आधार पर दखल देंगे। हम मानवाधिकार से जुड़े संगठन हैं। अगर इन लोगों (रोहिंग्याओं) को उनके देश वापस भेजा जाता है तो हम इसे मानवाधिकारों के उल्लंघन के तौर पर देखते हैं।’
माना जा रहा है कि आयोग अपने दलील मजबूत करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के कई आदेशों का हवाला भी कोर्ट के सामने देगा। इन आदेशों में कहा गया है कि संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और सुरक्षा का अधिकार सभी को है, भले ही वे भारत नागरिक हों या नहीं। इससे पहले, पिछले महीने गृह मंत्रालय को एक नोटिस जारी करके रोहिंग्या शरणार्थियों को वापस भेजने के फैसले की आलोचना की थी। आयोग ने कहा था, ‘भारत सदियों से शरणार्थियों का घर रहा है। यहां विभिन्न देशों से बड़ी तादाद में शरणार्थी आते रहे हैं।’
बता दें कि गृह मंत्री राजनाथ सिंह ने शुक्रवार को इस बात की पुष्टि की थी कि सरकार रोहिंग्या शरणार्थियों पर 18 सितंबर को कोर्ट में हलफनामा दायर करेगी। गृह मंत्रालय ने इस मामले में अपने आधिकारिक रुख का खुलासा नहीं किया है। सूत्रों ने कहा कि यह बहुत कुछ हाल ही में राज्य सरकारों को भेजी गई अडवाइजरी जैसा ही होगा, जिसमें रोहिंग्याओं को सुरक्षा के लिए खतरा बताया गया था। सरकार ने राज्यों को रोहिंग्या शरणार्थियों की पहचान करने और उन्हें वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू करने के लिए कहा था।
दो रोहिंग्या शरणार्थी-मोहम्मद सलीमुल्लाह और मोहम्मद शाकिर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल की है। दोनों यूएन हाई कमिशन ऑफ रिफ्यूजीज़ (UNHCR) के तहत रजिस्टर्ड हैं। दोनों ने अपनी याचिका में कहा है कि उन्होंने म्यांमार में अपने समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हुए जुल्मों और खून-खराबे की वजह से वहां से भागकर भारत में शरण लिया था। दोनों ने याचिका में स्वदेश वापस भेजे जाने का विभिन्न आधार पर विरोध किया है। इन्होंने मानवाधिकारों पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों का उल्लंघन की दलील भी दी है।