सेना की नीति से पाकिस्तान की राजनीति में आतंकियों का दखल!

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लाहौर। पाकिस्तानी सेना अपनी नीति के तहत देश में आतंकी समूहों से संबंध रखने वाले राजनीतिक दलों को बढ़ावा देने में जुटी है। रविवार को पाकिस्तान में पूर्व प्रधानमंत्री नवाज शरीफ की खाली हुई सीट पर उपचुनाव होना है। इस उपचुनाव में 2008 मुंबई धमाकों के आरोपी हाफिज सईद के ‘चैरिटी’ संगठन द्वारा लॉन्च की गई पार्टी मिल्ली मुस्लिम लीग का पसंदीदा उम्मीदवार भी अपनी दावेदारी पेश कर रहा है।

बता दें कि लाहौर सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए मिल्ली मुस्लिम लीग ने याकूब शेख को अपना उम्मीदवार घोषित किया था। इसी बीच पाकिस्तान के चुनाव आयोग ने कहा कि मिल्ली मुस्लिम के कानूनी रूप से पंजीकृत न होने की वजह से वह इस उपचुनाव में नहीं उतर सकती। याकूब शेख अब निर्दलीय उम्मीदवार के तौर पर लाहौर सीट के लिए चुनावी मैदान में है और उसे मिल्ली मुस्लिम लीग का समर्थन हासिल है।

पाकिस्तान के पूर्व लेफ्टिनेंट जनरल अमजद के मुताबिक, मिल्ली मुस्लिम लीग का राजनीति में आना पाकिस्तानी सेना की उस नीति का हिस्सा है, जिसे खुद नवाज शरीफ ने पिछले साल नामंजूर किया था। पाकिस्तानी सेना की यह नीति धार्मिक अतिवादियों को हिंसक जिहाद से दूर ले जाने के लिए उन्हें राजनीति के जरिए मुख्यधारा में लाने की थी। अमजद ने कहा, ‘हमें शांतिप्रिय तत्वों को हथियार उठाने वाले तत्वों से दूर रखना होगा।’ बता दें कि पाकिस्तान सेना पर लंबे समय से पड़ोसी भारत के खिलाफ छद्म लड़ाके खड़े करने के लिए आतंकी समूहों को बढ़ावा देने के आरोप लगते रहे हैं।

अमेरिका द्वारा आतंकी घोषित एक और इस्लामिक कट्टरपंथी, फजलुर रहमान खलिल ने समाचार एजेंसी रॉयटर्स को बताया कि वह जल्द ही अपनी राजनीतिक पार्टी बनाने की योजना बना रहा है। खलिल के मुताबिक वह ऐसा करके कड़े इस्लामिक कानूनों की वकालत करेगा। खलिल ने कहा, ‘हम मुख्यधारा में आएंगे, हमारे देश को अभी देशभक्त लोगों की जरूरत है।’ बता दें कि अमेरिका, सईद के ‘चैरिटी’ संगठन और खलिल के संगठन दोनों को ही आतंकवाद को बढ़ावा देने वाले संगठन मानता है। पाकिस्तानी सेना पर लंबे समय से ऐसे संगठनों को पनाह देने के आरोप लगते रहे हैं।