नर्मदा घाटी का संकट त्रासदी की ओर अग्रसर : सुभाषिणी अली सहगल

0
47

भोपाल । नर्मदा घाटी में स्थिति बेहद गंभीर है क्योंकि जल सत्याग्रह करने वालों की छाती तक पानी आ गया है। संकटग्रस्त स्थिति बेहद गंभीर त्रासदी की ओर बढ़ रही है। यह बात सीपीआई(एम) पोलिट ब्यूरो सदस्या एवं पूर्व सांसद सुभाषिणी अली सहगल ने नर्मदा डूब क्षेत्र का दौरा करने के बाद यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। यहां उन्होंने कहा कि कल तक अंजड़ में विशाल प्रदर्शन के बाद से आंदोलनकारी जिस छोटा बड़दा गाँव में पाँव-पाँव पानी में बैठे थे – अब खबर है कि रात में वहां पानी उनकी छाती तक पहुंच गया है।
नर्मदा घाटी के संकट से आगाह करते हुए पूर्व सांसद सुभाषिणी ने कहा कि बड़वानी और धार सहित समूची घाटी की जनता के जायज और सर्वसम्मत विरोध की उपेक्षा करके सरदार सरोवर को भरा जा रहा है ताकि 17 सितम्बर को इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन पर उन्हें भेंट किया जा सके। उन्होंने कहा कि ऐसा इसलिए किया जा रहा है ताकि गुजरात विधानसभा चुनाव में वोट पाने की एक कथित उपलब्धि के नाम पर उसे प्रचार का हथियार बनाया जा सके। उन्होंने कहा कि नर्मदा घाटी के रहवासियों के समक्ष प्रस्तुत मौजूदा संकट किसी एक राज्य के विधानसभा चुनाव को जीतने के लिए दूसरे राज्य को डुबोने का असाधारण और अत्यंत शर्मनाक उदाहरण है। मानव इतिहास में इसकी मिसाल सिर्फ एक-दो हजार साल पहले की सम्राट नीरो के अमानुषिक आचरण में मिलती है। आधुनिक नीरो उस रिकॉर्ड को भी लांघते प्रतीत हो रहे हैं। उन्होंने कहा की बेहद कम बारिश होने के बाद भी निसरपुर समेत वो हिस्से भी डूबना आरम्भ हो गए हैं जिनके बारे में दावा किया गया था कि वे किसी हालत में डूब नहीं सकते हैं। सरदार सरोवर झूठे आंकड़ों और गढ़े गए तथ्यों पर खड़ा किया गया एक ऐसा छलावा है जिसकी कोई दूसरी मिसाल नहीं। ऐसी भी कोई सरकार नहीं हुई होगी जिसने बाकायदा शपथपत्र पर एकदम झूठी जानकारी देकर, प्रभावित इलाकों और पुनर्वास सहित हरेक मामले में, देश के सर्वोच्च न्यायालय तक को गुमराह किया हो। उन्होंने कहा की 40 हजार परिवार और 139 गाँवों का डूबना एक बेहद बड़ी संख्या है। इतने गंभीर मामले में भी मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री की खामोशी तथा डूब को बढ़ने देना अपनी कुर्सी बचाये रखने और अपने राजनीतिक आकाओं, नरेंद्र मोदी, अमित शाह को खुश करने की चाटुकारिता के सिवाय कुछ नहीं है।
सुभाषिणी ने यहां कहा की सीपीआई(एम) नर्मदा के आन्दोलनकारियों का समर्थन करती है और मांग करती है कि सरदार सरोवर में पानी भरना तत्काल प्रभाव से बंद किया जाए। उसके गेट्स खोल दिए जाएं। सर्वोच्च प्राथमिकता के साथ सभी 40 हजार परिवारों का पूर्ण पुनर्वास किया जाए। पुनर्वास घोटाले, झूठे सर्वे, असत्य शपथपत्रों की सघन जांच के लिए हाईकोर्ट के एक न्यायाधीश की अध्यक्षता में समिति बनाई जाए और दोषियों को उदाहरण पेश करने वाला कठोर दंड दिया जाए। उन्होंने कहा कि गुजरात विधानसभा चुनाव अभियान को शुरू करने के लिए प्रधानमंत्री मोदी के जन्मदिन 17 सितम्बर को सरदार सरोवर पर होने वाला का प्रहसन रोका जाए। इसके साथ ही पूर्व सांसद सुभाषिणी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इस तरह के किसी भी आयोजन में हिस्सा लेकर मध्यप्रदेश की डूब प्रभावित आबादी, प्रदेश की जनता और अपने पद की गरिमा का अपमान न करें।