दिल्ली में लैंड पूलिंग पॉलिसी में बदलाव, DDA को जमीन ट्रांसफर नहीं

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नई दिल्ली। दिल्ली में मकानों की डिमांड सप्लाई का गैप कम करने के इरादे से अब सरकार ने लैंड पूलिंग पॉलिसी को रफ्तार देने की कवायद शुरू कर दी है। लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत जमीन को अब दस्तावेजों में डीडीए के नाम ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं होगी यानी इस पॉलिसी के तहत जिन किसानों या डेवलपर की जमीन होगी, वह उनके नाम ही रहेगी। इस तरह से दस्तावेजों में पहले डीडीए के नाम ट्रांसफर कराने और फिर डीडीए से वापसी ट्रांसफर कराने की लंबी प्रक्रिया से बचा जा सकेगा।
इसके अलावा डीडीए से कहा गया है कि जिस एरिया में लैंड पूलिंग पॉलिसी लागू होनी है, वहां के लिए वह फौरन ही सर्विसेज के लिए तैयारी शुरू करे और अभी से विकल्पों का पता लगाए कि उस एरिया में बनने वाले मकानों के लिए पानी, बिजली का कैसे इंतजाम होगा और सीवर लाइनें आदि बिछाने की प्रक्रिया कैसे शुरू होगी। डीडीए से यह भी कहा गया है कि पॉलिसी को मूर्त रूप देने के लिए वह सिंगल विंडो अप्रूवल सिस्टम समेत सारी प्रक्रियाओं को फाइनल करे।
उम्मीद की जा रही है कि दिल्ली में लैंड पूलिंग पॉलिसी के लिए फिलहाल जिन पांच जोन की पहचान की गई है, वहां 22 हजार हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होगी। इस तरह से इन एरिया में 20 से 25 लाख मकानों का निर्माण किया जा सकेगा। डीडीए ने आकलन किया है कि इसी क्षेत्र में 95 लाख की आबादी के रहने का इंतजाम हो सकेगा।
लैंड पूलिंग से जुड़े ये फैसले गुरुवार को दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल और आवास एवं शहरी कार्यमंत्री हरदीप पुरी के बीच हूई बैठक में लिए गए। बैठक में सचिव दुर्गा शंकर मिश्र भी मौजूद थे। मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी के मुताबिक इस बैठक में तय किया गया कि डीडीए की भूमिका सुविधा उपलब्ध कराने वाली की होनी चाहिए इसलिए जमीन के टाइटल के ट्रांसफर की प्रक्रिया को कम करके इस पॉलिसी को लागू होने में लगने वाले वक्त को कम किया जा सकता है।
अब जिस जमीन को विकसित करना होगा, उसे डीडीए के नाम ट्रांसफर कराने की जरूरत नहीं होगी। डीडीए उस जमीन पर सुविधाएं विकसित करने के अलावा प्लानिंग भी करेगा ताकि वहां बनने वाले मकान तय मानकों और तय नियमों के मुताबिक बनें। इन सुविधाओं में पार्क से लेकर वे सभी सुविधाएं शामिल होंगी, जो किसी भी रिहाइशी एरिया में होनी चाहिए। इन सुविधाओं यानी सड़कों, पार्क, कम्युनिटी सेंटर के बाद बचने वाली जमीन फिर से जमीन मालिक को दे दी जाएगी ताकि वह वहां अपनी पसंद के मुताबिक मकानों का निर्माण करके उन्हें बेच सके।
इस तरह से लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत डीडीए खुद जमीन का अधिग्रहण करके मकान बनाकर बेचने की बजाय सिर्फ प्लानिंग करने और सुविधाएं विकसित करने का कार्य करेगा। इस बैठक में लैंड पूलिंग पॉलिसी के लागू होने में हो रही देरी पर भी चिंता जताई गई। उल्लेखनीय है कि इसी पॉलिसी के लिए 89 गांवों को दिल्ली म्युनिसिपल ऐक्ट के तहत शहरी क्षेत्र घोषित करने का कार्य लंबे वक्त से अटका हुआ था। आवास मंत्री ने दिल्ली के उपराज्यपाल को इन गांवों को म्युनिसिपल ऐक्ट के तहत नोटिफाई करने के लिए धन्यवाद करते हुए कहा कि इस अड़चन के दूर होने से अब इस पॉलिसी पर जल्द ही काम होगा।
पांच जोन में होगा
लैंड पूलिंग पॉलिसी के तहत फिलहाल दिल्ली के पांच जोन चुने गए हैं। मास्टर प्लान 2021 के तहत आने वाले जोन जे, के 1, एल, एन और पी2 जोन शामिल हैं। दिल्ली में जमीन की कमी को देखते हुए ही इन जोन में बनने वाले मकानों के लिए एफएआर 400 देने का फैसला लिया गया है। सामान्यत: यह एफएआर 150 होता है। इसके अलावा सस्ते मकानों को बढ़ावा देने के लिए अतिरिक्त 15 फीसदी एफएआर भी मंजूर किया गया है।
25 लाख तक बनेंगे मकान
मंत्रालय के अधिकारियों का कहना है कि उम्मीद की जा रही है कि इस क्षेत्र में मकानों के निर्माण के लिए 22 हजार हेक्टेयर जमीन उपलब्ध होगी। इससे अनुमान है कि यहां 20 से 25 लाख मकान बनेंगे और उनमें लगभग 95 लाख लोग रहेंगे। इस तरह से अाने वाले कुछ सालों में यह क्षेत्र एक और उपनगर के रूप में विकसित होता नजर आएगा।
वापस कितनी मिलेगी जमीन
अफसरों का कहना है कि इस पॉलिसी के तहत जितनी जमीन होगी, वह पहले डीडीए को दी जाएगी। इसके बाद डीडीए वहां सड़कें, पार्क आदि की प्लानिंग करेगी और इन कार्यों के लिए जमीन की पहचान की जाएगी। इसके अलावा वहां सीवर लाइन, पेयजल लाइनें आदि बिछाई जाएंगी। उसके बाद बाकी बची जमीन वापस दी जाएगी। मोटे तौर पर यह माना गया है कि अगर जमीन 20 हेक्टेयर है तो उसमें 60 फीसदी जमीन वापस होगी जबकि 40 फीसदी पर जनसुविधाएं विकसित होंगी। इसी तरह से अगर जमीन दो से लेकर 20 हेक्टेयर है तो 48 फीसदी लैंड वापस होगी। जो 60 फीसदी जमीन वापस होगी, उसमें 53 फीसदी पर आवासीय मकान, पांच फीसदी जमीन पर कमर्शल और दो फीसदी पब्लिक और सेमी पब्लिक इस्तेमाल के लिए होगी।
यहां गरीब लोगों के लिए बनने वाले सस्ते मकान का साइज 32 से 40 मीटर रखना होगा और आधे मकान उस क्षेत्र में कार्य करने वालों के लिए रखने होंगे। इस तरह से डीडीए जो जमीन लेगी, उसमें से कुछ पर वह मकान बनाकर उन्हें बेचेगी। इस तरह से वह अपने खर्चों की भरपाई करेगी।