सामान्य से कम वजन के बच्चों में शीर्ष पर भारत

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    नई दिल्ली: इसे बुलंदी की ओर बढ़ रहे भारत की बदरंग तस्वीर ही कहा जाएगा। यहां सामान्य से कम वजन वाले बच्चों की संख्या दुनिया में सर्वाधिक है। देश में पिछले साल ऐसे 9.7 करोड़ बच्चे थे। वहीं दुनिया के अधिकतर देश बच्चों में बढ़ते मोटापे से भी हलकान हैं। इंपीरियल कॉलेज ऑफ लंदन और विश्व स्वास्थ्य संगठन के संयुक्त अध्ययन में यह बात सामने आई है। अध्ययन साइंस जर्नल द लैंसेट में प्रकाशित हुआ है।
    सुधार लेकिन स्थिति गंभीर
    भारत में सामान्य से कम वजन वाले पांच से 19 वर्ष के बच्चों और युवाओं की संख्या भले की चार दशक में सर्वाधिक हो लेकिन इसमें कमी भी दर्ज की गई है। 1975 में देश में 24.4 फीसद लड़कियां और 39.3 फीसद लड़के सामान्य से कम वजन का शिकार थे। 2016 में 22.7 फीसद लड़कियां और 30.7 फीसद लड़के इसका शिकार थे।
    13 करोड़ लोगों पर अध्ययन 
    शोधकर्ताओं ने 13 करोड़ बच्चों और युवाओं पर अध्ययन किया। इनमें 3.15 करोड़ लोगों की आयु पांच से 19 साल है और 9.74 करोड़ की आयु 20 साल या उससे अधिक है। इनके बॉडी मास इंडेक्स (बीएमआइ) का अध्ययन करके 1975 से 2016 तक मोटापे का असर देखा गया।
    मोटापे में दस गुना वृद्धि
    1975 से 2016 तक विश्व में बच्चों और किशोरों में मोटापे की दर में वृद्धि दर्ज की गई। 1975 में यह दर एक फीसद से कम थी। जबकि 2016 में लड़कों में आठ फीसद (7.4 करोड़) और लड़कियों में छह फीसद (पांच करोड़) दर्ज की गई। 2016 में मोटापे के शिकार पांच से 19 वर्ष की आयु वाले बच्चों और युवाओं की संख्या 12.4 करोड़ पहुंच गई। 1975 में यह 1.1 करोड़ थी। यह वृद्धि दस गुना है। वहीं 21.3 करोड़ बच्चे व युवा अधिक वजन के शिकार पाए गए। लेकिन इनमें मोटापे की आशंका कम है।
    19.2 करोड़ बच्चे कम वजनी
    2016 में विश्व में सामान्य से कम वजन वाले बच्चों की संख्या 19.2 करोड़ थी। इनमें से 7.5 करोड़ लड़के व 11.7 करोड़ लड़कियां हैं।