हिप्र: मंडी में भूस्खलन के चलते 46 लोगों की मौत, परिजनों को 5 लाख मुआवजा

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मंडी। हिमाचल प्रदेश के मंडी में भूस्खलन में मरने वालों की संख्या बढ़कर 46 हो गई है। ये सभी मृतक उन दो रोडवेज की बसों के यात्री हैं जो भूस्खलन की चपेट में आ गई थी। वहीं, मृतकों की संख्या बढ़ने की आशंका जताई जा रही है। यह हादसा शनिवार की देर रात हुआ। एक बस चंबा से मनाली जा रही थी, जबकि दूसरी मनाली से जम्मू के कटरा के सफर पर थी। रात होने के कारण राहत और बचाव का काम सुबह तक के लिए रोक दिया गया है।
बताया जा रहा है कि यह हादसा तब हुआ जब दोनों बसें रिफ्रेशमेंट के लिए जोगिंदरनगर के पास कोटरूपी में रुकी थीं। इस दौरान बादल फटने और भूस्खलन के चलते एक विशाल पत्थर मनाली से कटरा जाने वाली बस के ऊपर आ गिरा। इसके बाद बस लुढ़कते हुए 200 मीटर तक नीचे जा गिरी। इस बस में 7-8 लोग सवार थे। उधर चंबा से मनाली जाने वाली बस पूरी तरह पानी में बह गई और लुढ़कते हुए खाई में लगभग 2 किलोमीटर नीचे चली गई। यह बस पूरी तरह भरी हुई थी। बादल फटने और भूस्खलन के चलते सड़क का लगभग 250 मीटर हिस्सा बह गया है, जिसके बाद मंडी-जोगिंदरनगर सड़क पर वाहनों की आवाजाही बंद कर दी गई है। वाहनों को वैकल्पिक रास्ते की ओर डायवर्ट किया गया है।
घटना की पुष्टि करते हुए हिमाचल प्रदेश के ट्रांसपॉर्ट मंत्री जीएस बाली ने हादसे में करीब 50 लोगों के मारे जाने की आशंका जताई थी। रात 2 बजे से राहत और बचाव का काम चल रहा है। मंडी जिला प्रशासन को इस घटना की जानकारी रात में लगभग 12.35 बजे मिली। इसके बाद राहत और बचाव दल को तुरंत मौके पर भेजा गया। हादसे के बाद लगभग 250 मीटर में फैले मलबे की वजह से व्यस्त रहने वाला नैशनल हाइवे ब्लॉक हो गया है।
मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने घटनास्थल का दौरा किया है। उन्होंने मृतकों के परिजनों के लिए 5 लाख रुपये सहायता राशि की घोषणा की है। मुख्यमंत्री ने कहा, ‘हम घर बनाने के लिए लोगों को पैसे देंगे। आखिरी शव मिलने तक राहत कार्य जारी रहेगा।’
प्रशासन ने सेना और एनडीआरएफ की टीम को रेस्क्यू ऑपरेशन में मदद के लिए बुलाया है। बताया जा रहा है कि कई लोग मलबे के नीचे दबे हुए हैं, जिन्हें बाहर निकालने की कोशिशें लगातार जारी हैं। प्रशासन के तमाम अधिकारियों के साथ मंडी के डेप्युटी कमिश्नर और पुलिस लगातार मौके पर मौजूद हैं।
लगातार हो रहीं भूस्खलन की घटनाओं के चलते हिमाचल प्रदेश में सड़क का सफर इन दिनों काफी जोखिम भरा हो गया है। खास तौर पर चंडीगढ़-मंडी नैशनल हाइवे में कुछ जगहों पर और साथ ही पठानकोट-मंडी नैशनल हाइवे पर जोगिंदरनगर और मंडी के बीच सफर करना काफी खतरनाक हो गया है। इसके अलावा चंडीगढ़-शिमला हाइवे पर परवानू और सोलन के बीच भी सफर के दौरान हादसे का रिस्क काफी बढ़ गया है।