वर्ल्ड एथलेटिक्स: जैवलिन थ्रो के फाइनल में पहली बार पहुंचा भारतीय खिलाड़ी

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लंदन: देवेंद्र सिंह कांग ने इतिहास रच दिया और भारत के पहले ऐसे खिलाड़ी बने जिन्होंने वर्ल्ड एथलेटिस्क के जैवलिन थ्रो प्रतियोगिता के फाइनल राउंड में जगह बनाई। वहीं दूसरी तरफ उनके साथी खिलाड़ी नीरज चोपड़ा क्वालीफिकेशन राउंड से बाहर हो गए।
क्वालिफिकेशन राउंड के ग्रुप बी में कंधे की चोट से ग्रसित कांग ने लोहे के भाले को तीसरी और फाइनल थ्रो में 84.22 मीटर तक फेंका जबकि इस राउंड को क्वालीफाई करने के लिए भाले को 83 मीटर तक फेंकना था। उन्होंने पहली बार में भाले को 82.22 मीटर जबकि दूसरी बार में 82.14 मीटर तक फेंका। पंजाब का यह 26 वर्षीय खिलाड़ी पर फाइनल थ्रो के वक्त जबरदस्त दवाब में था क्योंकि उसे भाले को 83 मीटर तक फेंकना था और भारत की तरफ से वो आखिरी खिलाड़ी थे। फाइनल थ्रो में उन्होंने भाले को तय दूरी के पार फेंक दिया और इससे भारतीय कैंप को बड़ी राहत मिली।
अब 13 खिलाड़ियों में जिसमें से ग्रुप ए से पांच और ग्रुप बी से सात ने क्वालीफिकेशन के लिए तय दूरी तक भाले को फेंका वो 12 अगस्त को फाइनल राउंड में भिड़ेंगे। कांग ने फाइनल थ्रो में भाले को 84.22 मीटर तक पहुंचाया और वो ग्रुप बी में सातवें नंबर पर रहे। दिल्ली में मई में आयोजित इंडियन ग्रां प्री प्रतियोगिता के बाद से कांग लगातार कंघे की चोट से जूझ रहे हैं। आपको बता दें कि इससे पहले किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने वर्ल्ड चैंपियनशिप में जैवलिन थ्रो के फाइनल में जगह नहीं बनाई थी।
फाइनल में जगह बनाने के बाद कांग ने कहा कि जब मुझे पता चला कि नीरज क्वालीफाई नहीं कर पाया है तो मैं फाइनल में जगह बनाने को बेताब हो गया। मैं अपने देश के लिए कुछ करना चाहता था। मैं चाहता था कि जो किसी भी भारतीय खिलाड़ी ने पहले नहीं किया वो मैं करूं और भगवान के आशीर्वाद से मैं देश के लिए आखिरकार कुछ कर पाया।
कांग ने बताया कि वो मई से इंडियन ग्रां प्री के समय से ही दाएं कंघे की चोट से जूझ रहे हैं लेकिन ये बड़ी समस्या नहीं है। टीम के मालिशवाले ने मुझे ये पट्टियां लगाई हैं और मैं ठीक हूं। हालांकि मैंने अपने दोस्त और श्रीलंका के खिलाड़ी वरुणा रनकोथ से तीसरे और फाइनल थ्रो से ठीक पहले मदद मांगी और उन्होंने स्ट्रेचिंग में मेरी मदद की। मेरी ये चोट एक दिन आराम करने के बाद ठीक हो जाएगी और मैं फाइनल मुकाबले में अपना सर्वश्रेष्ठ देना चाहता हूं साथ ही देश के लिए पदक भी जीतना चाहता हूं।