सीएम प्रोजेक्ट करने पर कांग्रेस की दुविधा!

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कांग्रेस पार्टी राज्यों के विधानसभा चुनाव में मुख्यमंत्री पद का दावेदार पेश करने के सवाल पर दुविधा में है। असल में कांग्रेस के वरिष्ठ नेता इस सवाल पर बंटे हुए हैं। कई नेता ऐसे हैं, जो पंजाब मॉडल को आजमाना चाहते हैं। उनका कहना है कि कैप्टन अमरिंदर सिंह को मुख्यमंत्री पद का दावेदार घोषित करने का फायदा हुआ था, इसलिए दूसरे राज्यों में भी इसे आजमाया जाना चाहिए। जबकि कई नेता इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि कांग्रेस ने कैप्टेन अमरिंदर सिंह को 2012 के चुनाव में भी सीएम प्रोजेक्ट किया था, लेकिन तब वे पार्टी के जीत नहीं दिला पाए थे।

कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी की टीम के एक नेता का कहना है कि पार्टी इस मामले में कोई कठोर सिद्धांत नहीं अपनाने जा रही हैं। अगर किसी राज्य में उसके पास बहुत मजबूत और आम सहमति वाला नेता होगा तो वह उसे पेश भी कर सकती है और अगर नहीं होगा को बिना सीएम प्रोजेक्ट किए, सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी। सामूहिक नेतृत्व का फार्मूला गुजरात में लागू हो रहा है। वहां कांग्रेस किसी को सीएम दावेदार नहीं पेश करेगी। सामूहिक नेतृत्व दिखाने के लिए कांग्रेस ने वहां अध्यक्ष के साथ साथ चार कार्यकारी अध्यक्ष बना दिए हैं।

हिमाचल प्रदेश में चूंकि कांग्रेस की सरकार है और वीरभद्र सिंह मुख्यमंत्री हैं इसलिए उसे वहां के बारे में फैसला नहीं करना है। पार्टी उन्हीं की कमान में लड़ेगी। इसी तरह कर्नाटक में भी अगले साल कांग्रेस सिद्धरमैया के नेतृत्व में ही लड़ेगी। लेकिन मध्य प्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को फैसला करना है। इन तीनों राज्यों में अगले साल चुनाव होने वाले हैं। छत्तीसगढ़ में कांग्रेस के पास कोई सर्वमान्य नेता नहीं है। राज्य के पहले मुख्यमंत्री अजित जोगी पार्टी छोड़ कर जा चुके हैं और विद्याचरण शुक्ल का निधन हो चुका है। मोतीलाल वोरा उम्र और सेहत की वजह से काफी पहले चुनावी राजनीति से अलग हैं। इसलिए वहां भी कांग्रेस सामूहिक नेतृत्व में लड़ेगी।

मध्य प्रदेश और राजस्थान में कांग्रेस के सामने दोनों विकल्प हैं। लेकिन कई चेहरे होने की वजह से पार्टी फैसला नहीं कर पा रही है। मध्य प्रदेश में ज्योतिरादित्य सिंधिया और कमलनाथ में से किसी एक का चेहरा पेश किया जाना है। पार्टी आलाकमान दोनों नेताओं की कमजोरी और उनकी ताकत का आकलन कर रहा है। इन दो में से किसी एक को चुनने पर दूसरा क्या करेगा और दिग्विजय सिंह, सुरेश पचौरी, अरुण यादव, कांतिलाल भूरिया आदि नेताओं का क्या रुख होगा इसका भी आकलन किया जा रहा है। इसी तरह राजस्थान में अशोक गहलोत, सीपी जोशी और सचिन पायलट के चेहरे में से किसी एक को चुनने की चर्चा है। पर वहां भी फैसला आसान नहीं होगा।