सरकार ने कहा, बच्चों की सेफ्टी के लिए उठाए गए हैं कदम

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नई दिल्ली:सुप्रीम कोर्ट में केंद्र सरकार ने हलफनामा दायर कर कहा है कि बच्चों की सेफ्टी के लिए तमाम कदम उठाए गए हैं। सरकार की ओर से कोर्ट को अंडरटेकिंग दी गई कि जैसी जरूरत होगी उस हिसाब से कदम उठाए जाएंगे। रायन इंटरनैशनल स्कूल में 7 साल के बच्चे की हत्या के बाद स्कूलों में सेफ्टी के लिए गाइडलाइंस बनाए जाने के लिए दाखिल अर्जी पर सुनवाई के दौरान केंद्र ने ये बातें कहीं।
पिछली सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने राज्य और केंद्र सरकार से कहा था कि वह ऐसा दिशा-निर्देश बनाएं, ताकि बच्चों को स्कूल में भय का माहौल न लगे और कोई डर न रहे। केंद्र सरकार के साथ-साथ तमाम राज्य सरकारों से कहा था कि बच्चों की सुरक्षा के लिए जवाबदेही तय करने को लेकर गाइडलाइंस बनाए जाने के मामले में सुझाव दें। एचआरडी मिनिस्ट्री की ओर से दाखिल हलफनामे में कहा गया है कि स्कूली बच्चों की सेफ्टी के लिए तमाम कदम उठाए हैं और समय-समय पर गाइडलाइंस जारी की जाती रही है। जब भी जरूरत हुई है बच्चों की सेफ्टी के लिए अडवाइजरी और गाइडलाइंस जारी हुई हैं।
आईपीसी और इंटरनैशनल लॉ को ध्यान में रखा गया है। इसके तहत गाइडलाइंस जारी कर कहा गया कि स्कूलों में साफ-सफाई का ध्यान रखा जाए। वातावरण सेफ रहे इसके लिए आदेश जारी किए गए। स्टाफ और टीचर का वेरिफिकेशन हो इसके लिए निर्देश जारी हुए थे। साथ ही लड़का और लड़की, दोनों के टॉइलट अलग हों, इसके लिए आदेश पारित किया गया था। सुरक्षा और क्वॉलिटी एजुकेशन के लिए निर्देश जारी किया गया गया था। इसके लिए 22 जुलाई 2013 को निर्देश जारी हुए थे। इसके बाद 9 अक्टूबर 2014 को को गाइडलाइंस जारी की गई थी। 27 फरवरी 2017 को आपदा प्रबंधन के लिए निर्देश जारी किया गया था।
हाल की हटना के बाद एचआरडी मिनिस्ट्री ने तमाम राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के प्रिंसिपल सेक्रटरी को लिखा कि स्कूल स्टाफ और टीचर का वेरिफिकेशन कराया जाए। मृतक स्टूडेंट के पिता की ओर से उनके वकील सुशील टेकरीवाल ने अर्जी दाखिल कर स्कूलों में बच्चों की सेफ्टी के लिए गाइडलाइंस तय करने की गुहार लगाई है। अगली सुनवाई 30 अक्टूबर को होगी।