तालिबान की कैद से रिहा हुए अमेरिकी-कनाडाई दंपती

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इस्लामाबाद। आतंकी संगठनों को अपने हितों के लिए इस्तेमाल करने और उन पर कार्रवाई न करने के आरोपों में घिरा पाकिस्तान अब अमेरिकी दबाव के आगे हथियार डालता दिख रहा है। पाकिस्तान ने अफगान तालिबान से संबंधित आतंकी समूह हक्कानी नेटवर्क के कब्जे से अमेरिकी-कनाडाई दंपती को सुरक्षित बचाने में मदद की है। इससे पता चलता है कि पाकिस्तान किस तरह से आतंकवाद के मसले पर अमेरिकी दबाव के आगे झुकते हुए कार्रवाई करने को मजबूर है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने गुरुवार को खुद इस बात का ऐलान किया कि उनके प्रशासन ने अमेरिकी नागरिक और उसके कनाडाई पति की सुरक्षित रिहाई सुनिश्चित की है। दोनों को 2012 में हक्कानी नेटवर्क ने बंधक बना लिया था। बता दें कि इस आतंकी संगठन को अमेरिका ने एक बार ‘आईएसआई की सहायक संस्था’ तक करार दिया था। ट्रंप ने गुरुवार को एक बयान जारी कर कहा, ‘पाकिस्तान सरकार के साथ मिलकर काम करते हुए हमने बॉयले-कोलमैन की रिहाई सुनिश्चित कराने का काम किया है।’ यही नहीं ट्रंप ने इसके लिए पाकिस्तान को धन्यवाद भी कहा। हालांकि उन्होंने इस बारे में विस्तार से बताने से इनकार कर दिया कि कैसे कैटलान कोलमैन और जोशुआ बॉयले को रिहा कराया गया।
बयान के मुताबिक बंधक रहने के दौरान कोलमैन ने बंधक रहने के दौरान तीन बच्चों को भी जन्म दिया। बता दें कि इन दोनों की रिहाई में पाकिस्तान की ओर से मदद ऐसे वक्त में मिली है, जब कुछ दिन पहले ही पाक के विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ की अमेरिका यात्रा के दौरान ट्रंप प्रशासन ने उन्हें आतंकी संगठनों पर कार्रवाई करने को कहा था। यही नहीं अमेरिका ने चेताया था कि यदि आतंकियों के खिलाफ पाकिस्तान का नरम रवैया बना रहता है तो वह उसके खिलाफ जरूरी ऐक्शन लेने पर विचार करेगा।
माना जा रहा था कि यदि पाकिस्तान अपने रवैये पर अड़ा रहता है तो अमेरिकी ओर से मिलने वाली मदद में कटौती की जा सकती है। उसकी धरती पर आतंकियों क निशाना बनाकर एक बार फिर से ड्रोन अटैक तेज किए जा सकते हैं। इसके अलावा अंतिम विकल्प के तौर पर पाकिस्तान को आतंकी देश घोषित करने का फैसला भी किया जा सकता था। शायद इसी का असर था कि अमेरिका से पाकिस्तान लौटते ही विदेश मंत्री ख्वाजा आसिफ ने ऐलान किया कि उनका देश अमेरिका के साथ मिलकर हक्कानी नेटवर्क का सफाया करने के लिए प्रतिबद्ध है।