श्मशान में शव दफनाने को लेकर अलीगढ़ में तनाव

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अलीगढ़। उत्तर प्रदेश के अलीगढ़ में शव दफनाने को लेकर दो समुदायों के बीच तनाव पैदा हो गया है। 75 साल के स्थानीय बुजुर्ग को मौत के बाद श्मशान में दफना दिया गया, जिसके बाद दोनों पक्षों के बीच विवाद शुरू हो गया।
अलीगढ़ के सलेमपुर गांव में 6 बीघा जमीन सरकारी रेकॉर्ड में श्मशान के नाम है। इस जमीन को दोनों समुदाय पिछले कई वर्षों से इस्तेमाल कर रहे हैं। यह विवाद पिछले साल शुरू हुआ जब यहां के एक समुदाय के शख्स ने जमीन की स्थिति पता कर इसके हर किसी के प्रयोग का विरोध शुरू कर दिया।
गुरुवार को इस इलाके के शम्शुद्दीन की मौत के बाद उन्हें दफना दिया गया और इसके बाद दोनों पक्षों के बीच तनातनी शुरू हो गई। शम्शुद्दीन के भतीजे मोहम्मद अनीश ने बताया कि पिछले साल दूसरे समुदाय के एक परिवार ने अपने परिजन की मौत के बाद इसी कब्रिस्तान में अंतिम संस्कार किया था। इस घटना के बाद भी यहां बवाल हुआ था। दोनों पक्षों को पुलिस ने बुलाकर मामले में समझौता करा दिया था। उसके बाद से यह जमीन श्मशान घाट के लिए प्रयोग होने लगी।
दफनाने को लेकर विवाद
अनीश के अनुसार, ‘जब वह कब्रिस्तान में सुबह पहुंचा तो कुछ लोगों ने वहां दफनाने को लेकर झगड़ा शुरू कर दिया। उन्होंने पुलिस को बुलाया और हंगामा करने लगे।
सलेमपुर के वॉचमैन ने बताया कि उनके समुदाय के लोग लाश को इस जमीन पर दफन करने का विरोध करते हैं। यह जमीन श्मशान के नाम पर सरकारी रेकॉर्ड में दर्ज है। ऐसे में वे दूसरे समुदाय के लोगों को यहां दफनाने का विरोध करते हैं।
प्रशासन ने सुलह कराई
इलाके के एडीएम पंकज वर्मा ने बताया कि दोनों समुदाय पिछले कई वर्षों से उनके लोगों का अंतिम संस्कार इसी जमीन पर करते आ रहे हैं। दोनों के बीच विवाद पिछले वर्ष से शुरू हुआ जब जमीन की स्थिति लोगों के सामने आई।
उन्होंने बताया कि फिलहाल यह मामला सुलझा दिया गया है। छह बीघा जमीन से एक बीघा जमीन दूसरे समुदाय को कब्रिस्तान के लिए दे दी गई है। उन्होंने बताया कि गांव में अल्पसंख्यकों की संख्या बहुत कम है इसलिए इतनी जमीन उनके लिए काफी है।