अर्जन सिंहः जिन्होंने एक घंटे में हमले के लिए तैयार कर दिया था IAF को

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अर्जन सिंहः जिन्होंने एक घंटे में हमले के लिए तैयार कर दिया था IAF को

नई दिल्ली। सितंबर 1965 की बात है जब पाकिस्तान ने ऑपरेशन ग्रैंड स्लैम के तहत भारत पर हमला बोल दिया था। अखनूर जैसे अहम शहर को निशाना बनाया गया। तब के रक्षा मंत्री ने वायु सेना प्रमुख रहे अर्जन सिंह को अपने दफ्तर में बुलाया और एयर सपॉर्ट मांगा। अर्जन सिंह से पूछा गया कि वायु सेना को तैयारी में कितना वक्त लगेगा। उन्होंने बेहिचक जवाब दिया- एक घंटा। बात को कायम रखते हुए वायु सेना ने एक घंटे के अंदर पाकिस्तान पर हमला बोल दिया।

पूरे जंग के दौरान अर्जन सिंह ने वायु सेना को शानदार नेतृत्व दिया। कई बाधाओं के बावजूद उन्होंने जीत दिलाई। इस योगदान के लिए उन्हें पद्म विभूषण तो दिया ही गया, उनका चीफ ऑफ एयर स्टाफ का दर्जा बढ़ाकर एयर चीफ मार्शल कर दिया गया। वह भारतीय वायु सेना के पहले एयर चीफ मार्शल बने। इससे भी बड़ी बात यह कि 2002 में भारत सरकार ने उन्हें मार्शल रैंक से नवाजा और इस तरह वह एयर फोर्स के पहले और एकमात्र फाइव स्टार रैंक अफसर बने।

सरकार ने बताया है कि 98 साल के अर्जन सिंह ने शनिवार रात 7 बजकर 47 मिनट पर आखिरी सांस ली। शनिवार सुबह हृदयाघात के बाद उन्हें राजधानी स्थित आर्मी अस्पताल (रिसर्च ऐंड रेफरल) में दाखिल कराया गया था। सरकार का कहना है कि अर्जन सिंह भारत की नई पीढ़ी के प्रेरणास्रोत रहे हैं और आगे भी बने रहेंगे।

अर्जन सिंह ने महज 44 साल की उम्र में वायु सेना चीफ बनने की उपलब्धि हासिल की थी। 1962 में चीन से जंग का जब आखिरी दौर चल रहा था, तब वह डेप्युटी चीफ ऑफ एयर स्टाफ नियुक्त हुए थे और 1963 में ही वाइस चीफ बन गए। जब देश आजाद हुआ था तो उन्हें वायु सेना के 100 से ज्यादा विमानों के फ्लाई पास्ट की अगुवाई करने का सम्मान मिला। उन्हें 60 से ज्यादा किस्म के विमानों को उड़ाने का अनुभव था, जिनमें कई द्वितीय विश्व युद्ध से पहले के जमाने के थे।

वायु सेना में अपने कार्यकाल के आखिरी दौर में भी वह विमान उड़ाते रहे। जुलाई 1969 में रिटायर होने के बाद स्विट्जरलैंड के राजदूत बनाए गए थे। 1989 से 1990 के बीच वह दिल्ली के उप-राज्यपाल भी रहे। पानागढ़ स्थित एयर फोर्स स्टेशन का नाम उनके नाम पर रखा गया है।

बताया जाता है कि एक घंटे में हमले के लिए तैयार कर दिया था वायुसेना को अर्जन सिंह कहते थे कि जिसे अपने काम की जानकारी रहे, सबकी संतुष्टि के मुताबिक काम करे, अपने साथियों पर भरोसा रखे और प्रयास में ईमानदार तथा गंभीर रहे तो वह कभी गलत साबित नहीं होगा।