बाल विवाह रोकने के लिए सरकार उठाए सक्रिय कदम

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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने कानूनन रोक होने के बावजूद बड़े पैमाने पर हो रहे बाल विवाहों पर गहरी चिंता जताते हुए कहा है कि केंद्र और राज्य सरकारों को इसे रोकने के लिए सक्रिय कदम उठाने होंगे। कोर्ट ने कहा कि संविधान की प्रस्तावना में सामाजिक न्याय की प्रतिबद्धता जताई गई है।

लेकिन, इस मामले को देखने से पता चलता है कि सामाजिक न्याय संबंधी कानून उस भावना से लागू नहीं हो रहे, जिस भावना से संसद ने उन्हें बनाया था। यहां तक कि बाल विवाह निरोधक कानून की धारा 13 में भी अक्षय तृतीया पर होने वाले सामूहिक बाल विवाह का जिक्र है। कोर्ट ने कहा कि सिविल सोसायटी बाल विवाह रोकने के लिए काफी कुछ कर सकती है।

अदालत ने बाल विवाह की स्थिति बताने वाली कई रिपोर्टो का जिक्र किया है, जिनसे साबित होता है कि छोटी उम्र में बच्चियों की शादी से उनके शरीर और मन पर कितना बुरा प्रभाव पड़ता है। कोर्ट ने कहा कि वे उम्मीद करते हैं कि सरकार इन रिपोर्टो का गहनता से अध्ययन और विश्लेषण करेगी और बाल विवाह रोक अधिनियम को प्रभावी ढंग से लागू करेगी।