मुफ्त में मिले घरों की कीमत करोड़ रुपये से अधिक

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मुंबई:एजेंसी।सस्ते घर की उम्मीद लगाए लोगों को इस बार भी म्हाडा को निराश किया। आम लोगों को आवास उपलब्ध कराने वाली म्हाडा मुफ्त में मिले घरों से भी भरपूर पैसे कमाने में लगी है। इन घरों की कीमत एक करोड़ रुपये से अधिक रखी है। म्हाडा की लॉटरी में 819 घरों में से 204 घरों की कीमत 1.30 करोड़ रुपये से अधिक आई है। ऐसे में म्हाडा की कार्यशैली पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं। हाउसिंग विशेषज्ञ म्हाडा पर व्यापार करने का आरोप लगा रहे हैं।
इसमें उच्च आयवर्ग के लिए म्हाडा ने 338 घर शामिल किए हैं, जो मुंबई महानगर के अलग-अलग इलाकों में स्थित हैं। इनमें से 36 घर दक्षिण मुंबई में हैं। सिटी बिव इमारत के 36 घर म्हाडा ने लॉटरी में शामिल किए हैं। जिनकी कीमत 1.30 करोड़ रुपये के पार है। ज्ञात हो कि म्हाडा को यह घर उपकर प्राप्त इमारतों के पुनर्वसन पर बतौर हाउसिंग स्टॉक मिले हैं। यानी की इसके लिए म्हाडा को न तो कंस्ट्रक्शन चार्ज देना पड़ा और न ही जमीन के लिए पैसे देने पड़े हैं। ऐसे में सवाल यह उठता है कि म्हाडा इन घरों की कीमत इतना अधिक क्यों लगा रही है?
म्हाडा की लॉटरी में शामिल होने वाले घरों की कीमत हर आयवर्ग के लिए अलग-अलग तरह से तय की जाती है।
निम्नतम आयवर्ग के घर की कीमत: जमीन कीमत +निर्माण की लागत
निम्न आयवर्ग के घर की कीमत: जमीन की कीमत+निर्माण की लागत+ अन्य खर्च
मध्यम आयवर्ग के घर की कीमत : जमीन की कीमत+निर्माण की लागत+15 प्रतिशत लाभ
उच्च आयवर्ग के घर की कीमत: जमीन की कीमत+निर्माण की लागत+25 प्रतिशत लाभ
रमेश प्रभु, हाउसिंग एक्सपर्ट कहते हैं, म्हाडा एक सरकारी इकाई है, जिसका मुख्य उद्देश्य सस्ते दामों पर आम लोगों को घर मुहैया कराना है। लेकिन पिछले कई सालों से म्हाडा ने न सिर्फ उच्च आयवर्ग के घरों दाम बढ़ाए हैं, बल्कि निम्न आयवर्ग के भी दामों दोगुना इजाफा हुआ है। इससे ऐसा प्रतीत हो रहा है म्हाडा घरों का व्यापार कर रही है न कि लोगों को छत देने का काम कर रही है। ऐसे में प्रधानमंत्री सबको घर देना का सपना कैसे पूरा होगा। इस पर भी सवाल उठने लगे हैं।

Source: Shilpkar