सारे आगमों का आधार है सामयिक : साध्वी सुधाकंवरजी म.सा.

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मुंबईः मेवाड़ भवन गोरेगॉन में विराजित यश गुरुणी मैया की सुशिष्या प्रज्ञाज्योति महासती सुधनकवरजी म.सा. आदि ठाणा-5 की प्रवचन श्रंखला में मंगलमय भगवन महावीर की मंगलमय देशना फरमाते हुए महासती सुधा कंवरजी ने महान अभिग्रही वेणीचंदजी म.सा. के अभिग्रह पूर्ति दिवस में सामयिक दिवस पर फरमाते हुए कहाँ कि जिससे समभाव की प्राप्ति हो जाय उसे सामायिक कहते है जब समता भाव मनुष्य के जीवन में आजाय तो जिव हलकर्मी बन जाता है और हलुकर्मी जीव अपने कार्यो को हलका करते हुए कम समय में कर्मो को नष्ट कर मोक्षगामी बन जाता है।
महासती सुयशा ने फ़रमाया की किसी भी परिस्थिति में आप समभाव रखे चाहे आप ऑफिस में होया घर में समभाव के बिना मुक्ति नहीं हो सकती है। देवगुरु धर्म पर सच्ची श्रद्धा रखते हुए सच्ची साधना कर इस जीवन को इस चार गतिंयो के श्रमण से मुक्त करें। महासती विजय प्रभा ने भारत चक्रवाती का उदाहरण देते हुए फ़रमाया की उनकी बाह्य पदार्थो के प्रति उदासीनता, अनासक्ति ने मोक्ष गामी बना दिया। चेम्बूर उपसंघ की सेवा रही ।
कार्यक्रम में सुधा कंवर जी के लघु भ्राता भी उपस्थिति थे, कार्यक्रम में लगभग ५० दया के प्रत्याखान हुए। अध्यक्षजी  चतरलाल लोढ़ा ने संघ व्यवस्था पर अपने विचार रखे। कार्यक्रम में दिलीप नाबेड़ा, सुरेश सिंघवी, सुरेश आंचलिया, लक्ष्मीलाल वडालमिया, महेंद्रसिंह सुराणा, देवीलाल चपलोत, शौकीन पामेचा, चांदमल लोढ़ा, भगवतीलाल बोहरा, छीतरमल खाब्या, रोशनलाल कोठारी, बाबूलाल डांगी, मदनलाल बोहरा, मदनलाल सोनी, दिनेश बोहरा, तनसुख डांगी, गेहरीलाल कोचिता, कुंदन वागरेचा, कुंदन पगारिया, सुशिल कुकड़ा, विजय पोखरना, मनोज चोरडिया,गणपत ढ़ीलिवल महावीर चपलोत,कविता पामेचा,सुशीला लोढा, मनीषा कागरेचा, बरखा बडोला, ललिता लोढ़ा, केसरबेन कुमठ, सुंदरबेन बोहरा, कौशल्या पगारिया, आशा हिंगड़, शांताबेन डांगी, प्रभा बोहरा, मंजू ढ़ीलिवल, मिठुदेवी खाब्या, मालता सोनी, कमला डुंगरवाल, लाड़देवी चपलोत, प्रभा बोहरा, प्रेमदेवी ढ़ीलिवल, लक्ष्मीबाई मांडोत, कमला डांगी, दिलखुश वागरेचा, सुशीलादेवी कोठारी आदि की उपस्थिति रही। कार्यक्रम का संचालन महिला मंडल की महामंत्री कंचन सिंघवी ने किया। यह जानकारी विनोद चपलोत ने दी।