यूएस, ब्रिटेन से बढ़ी बनारसी साड़ी की डिमांड

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मुंबई:एजेंसी।जीएसटी के चलते पटरी से उतरा बनारसी साड़ी का बिजनेस अब धीरे-धीरे वापस पटरी पर आ रहा है। जीएसटी लागू होने के बाद जुलाई व अगस्‍त में बिजनेस में थोड़ी गिरावट आई थी लेकिन अब स्थिति सामान्‍य होने लगी है। दूसरी ओर फेस्टिव व शादियों का सीजन करीब होने के चलते बनारसी साडियों की डिमांड बढ़ने से और जीएसटी के प्रोसिजर से जुड़ी दिक्‍कतें दूर होने से इसके कारोबारियों को इस साल भी बनारसी साडियों के बिजनेस में डॉमेस्टिक लेवल पर 20-25 फीसदी की ग्रोथ होने की उम्‍मीद है। साथ ही विदेशों में भी इस साड़ी की अच्‍छी डिमांड होने से एक्‍सपोर्टर्स को इसके एक्‍सपोर्ट में पिछले साल की तुलना में 5-7 फीसदी का इजाफा होने का अनुमान है। बनारस में बनारसी साड़ी का बिजनेस लगभग 1000 करोड़ प्रति माह का है, जो फेस्टिव व शादियों के सीजन में बढ़कर लगभग 6000 करोड़ रुपए पर पहुंच जाता है।
जीएसटी से क्‍या आईं दिक्‍कतें
एसएंडडी डाइंग एंड प्रोसेसिंग कॉपरेशन प्राइवेट लिमिटेड के मर्चेंडाइजर संदीप ने मनी भास्‍कर से बातचीत में बताया कि जीएसटी आने के बाद बनारसी साड़ी का बिजनेस भी प्रभावित हुआ, जिसकी वजह लोगों को जीएसटी का प्रोसिजर को समझने में आ रही दिक्‍कत रही। इसके चलते एक्‍सपोर्ट में भी परेशानी आई। उन्‍होंने कहा कि इन दिक्‍कतों से बिजनेस उबर तो रहा है लेकिन अभी भी मार्केट थोड़ी टफ है।
स्‍टाइल इंडिया टेक्‍स स्‍टाइल प्राइवेट लिमिटेड, वाराणसी के मालिक जयप्रकाश मुंद्रा ने भी जीएसटी आने के बाद बनारसी साड़ी के बिजनेस में गिरावट की बात स्‍वीकारी।
अब क्‍या है स्थिति
कारोबारियों का कहना है कि बिजनेस के लिए जुलाई महीना काफी जद्दोजहद भरा रहा। लेकिन अब स्थिति धीरे-धीरे सुधर रही है। बिजनेस पहले की तरह नॉर्मल हो रहा है, जिसके चलते इस फेस्टिव व शादी के सीजन में भी हर साल की तरह बनारसी साड़ी का कारोबार 20-25 फीसदी बढ़ने का अनुमान है।
शादियों के सीजन में लगभग6हजार करोड़ पर पहुंच जाता है कारोबार
पूरे बनारस में बनारसी साडियों का कारोबार लगभग 1000 करोड़ प्रति माह का है। फेस्टिव व शादियों के सीजन में बिजनेस लगभग6 हजार करोड़ रुपए पर पहुंच जाता है। बनारसी साडियों का सबसे ज्‍यादा एक्‍सपोर्ट यूएस, यूके, लेबनान, सिंगापुर, मलेशिया जैसे देशों में होता है। फेस्टिव व शादियों के सीजन के दौरान कारोबार बढ़ने में इन देशों से बढ़ी मांग भी कारण बनती है। कारोबारियों ने बताया कि विदेशों में बसने वाले भारतीय भी फेस्टिवल्‍स और शादियों में ट्रेडिशनल कपड़े पहनना पसंद करते हैं, जिनमें बनारसी साडियां प्रमुख होती हैं। इसलिए इन दिनों में वहां से भी डिमांड बढ़ जाती है।
30-35फीसदी का होता है एक्‍सपोर्ट
एसएंडडी डाइंग एंड प्रोसेसिंग कॉपरेशन प्राइवेट लिमिटेड के मर्चेंडाइजर संदीप ने बताया कि बनारस में बनने वाली बनारसी साडियों में से लगभग30-35फीसदी का एक्‍सपोर्ट होता है। इसमें सबसे ज्‍यादा सप्‍लाई अमेरिकाब्रिटेनलेबनानसिंगापुर देशों में होती है। भारत की बात करें तो वैसे तो बनारसी साडियां पूरे देश में सप्‍लाई की जाती हैं। लेकिन सबसे ज्‍यादा डिमांड मुंबई,गुजरात,कोलकाता,दक्षिण भारत और दिल्‍ली से आती है।
60 फीसदी डिमांड हैंडलूम साडियों की
कारोबारियों का कहना है कि पावरलूम की बजाय हैंडलूम की बनी बनारसी साडियों की डिमांड बढ़ रही है। संदीप ने बताया कि इसकी वजह पावरलूम में क्रिएशन की कमी है। आने वाली डिमांड में से 60फीसदी डिमांड हैंडलूम की बनी साडियों की होती है। इसमें भी ट्रेडीशनल वर्क बहुत ज्‍यादा डिमांड में है।
50-70साल पुरानी डिजाइन्‍स की आती है डिमांड
1975से बनारसी साड़ी का काम करने वाले बुनकर जगदीश प्रसाद कुशवाहा ने बताया कि कई ग्राहक ऐसे भी हैं, जो अपने पूर्वजों व बुजुर्गों के टाइम की डिजाइन की डिमांड करते हैं। वे अपनी दादी-नानी के टाइम की 50से 70साल पुरानी साड़ी दिखाकर वैसे ही कपड़े व डिजाइन की डिमांड करते हैं और इसके लिए स्पेशल ऑर्डर दिए जाते हैं।
डेढ़ लाख रुपए तक है कीमत
कीमत की बात करें तो नाइलॉन या सिंथेटिक की बनी बनारसी साड़ी की कीमत1,500रूपए से शुरू होती है, जबकि असली बनारसी कही जाने वाली सिल्‍क की साड़ी कीमत 3,500रुपए से लेकर डेढ लाख रुपए तक है। इसके अलावा साड़ी की डिजाइन और कलर के मुताबिक भी कीमत तय होती है। जितनी भारी और बारीक डिजाइन होती है, कीमत उतनी ही बढ़ जाती है।

Source: Shilpkar