यमुना एक्‍सप्रेस-वे से अलग होना चाहता है जेपी ग्रुप

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नई दुनिया:एजेंसी। जेपी ग्रुप ने शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट से कहा है कि उसके पास यमुना एक्‍सप्रेस-वे के लिए 2500 करोड रुपए का ऑफर है और वह खुद इससे अलग होना चाहता है। जेपी ग्रुप ने कहा है कि इसे दूसरी पार्टी को बेचने की इजाजत दी जाए।
 23 को होगी अगली सुनवाई 
चीफ जस्टिस दीपक मिश्रा और जस्टिस एएम खानविलकर और डीवाई चंद्रचूड़ की बेंच ने कहा है कि इस मामले की सुनवाई 23 अक्‍टूबर को होगी।
 इन्‍सोलवेंसी प्रोसेस के खिलाफ याचिका 
दरअसल, सुप्रीम कोर्ट में जेपी इंफ्राटेक के रेसिडेंशियल प्रोजेक्‍ट्स के होम बायर्स की उस याचिका में सुनवाई कर रहा है, जिसमें बायर्स ने जेपी इंफ्राटेक के खिलाफ शुरू की गई इन्‍सोलवेंसी प्रोसेस को रोकने की मांग की थी।
 2000 करोड़ जमा कराने के निर्देश 
सुप्रीम कोर्ट ने 11 सितंबर को हुई पिछली सुनवाई में जेपी इंफ्राटेक से कहा था कि वो 27 अक्टूबर तक 2000 करोड़ रुपए जमा कराए। साथ ही, सुप्रीम कोर्ट ने कंपनी के डायरेक्टर्स के देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी थी। हालांकि कोर्ट ने जेपी के खिलाफ दिवालिया घोषित करने की प्रॉसेस जारी रखने को कहा था। कोर्ट ने इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) से भी कहा था कि होम बायर्स और क्रेडिटर्स के हितों की रक्षा की जाए और 45 दिन में इसका प्‍लान बना कर कोर्ट के समक्ष रखे।
 यह है मामला 
– 9 अगस्‍त को नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) ने जेपी इन्‍फ्राटेक लिमिटेड को दिवालिया (इनसॉल्वेंट) की श्रेणी में डालते हुए उसके खिलाफ इनसॉल्‍वेंसी का प्रोसेस शुरू करने की मंजूरी दी थी। यह ऑर्डर आईडीबीआई बैंक की पिटीशन पर दिया गया था।
– जेपी इन्फ्राटेक पर उसका करीब 526.11 करोड़ रुपए का डिफॉल्‍ट है। एनसीएलटी ने गुरुग्राम के चार्टर्ड अकाउंटेंट अनुज जैन को इं‍टरिम रिजॉल्युशन प्रोफेशनल अप्वॉइंट किया है। लेकिन होम बायर्स की शिकायत थी कि कि उन्‍हें सिक्‍योर्ड क्रेडिटर्स नहीं माना जा रहा है, इसलिए इन्‍सॉलवेंसी प्रोसेस रोका जाए। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने 4 सितंबर को मामले की सुनवाई हुई और इन्‍सॉल्‍वेंसी प्रोसेस पर स्‍टे लगा दिया गया।।
 क्‍या होता है आईआरपी ? 
इन्‍सोल्‍वेंसी एंड बैंकरप्‍सी कोड के मुताबिक, नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्‍यूनल (एनसीएलटी) द्वारा किसी एक प्रोफेशनल को इंटरिम रिजॉल्यूशन प्रोफेशनल (आईआरपी) अप्वॉइंट किया जाता है। ये कंपनी का पूरा मैनेजमेंट संभाल लेता है और तय वक्त में प्‍लान तैयार कर एनसीएलटी को सौंपता है। इस प्‍लान के मुताबिक, कंपनी के क्रेडिटर्स को उनका पैसा लौटाया जाता है।

Source: Shilpkar