आरुषि हत्या: सवालों में सीबीआई की थिअरी, आखिर हत्यारा कौन?

0
62

नई दिल्ली। देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री 9 साल बाद जहां से चली थी वहीं पहुंच गई। इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आरुषि और हेमराज हत्याकांड में तलवार दंपती को बरी कर दिया और इस तरह देखा जाए तो यह मर्डर मिस्ट्री फिर उलझ गई। हाई कोर्ट ने तलवार दंपती को बरी कर दिया, ऐसे में जाहिर है कि कातिल कोई और है। 9 साल पहले 15 व 16 मई 2008 की रात को जब आरुषि की हत्या हुई थी तब सवाल यह उठा था कि हत्यारा कौन है? मामले की जांच शुरू हुई और जांच एजेंसी की बदलती थिअरी और उस पर उठते सवालों के बीच यह केस आगे बढ़ता रहा। शुरू से लेकर आखिर तक यह केस मिस्ट्री बनी रही और अब भी यह सवाल कायम है कि आखिर कातिल कौन है?
2008 के 15 व 16 मई की रात नोएडा के जलवायु विहार में डॉक्टर राजेश तलवार और नूपुर तलवार की बेटी आरुषि की हत्या की जाती है। गला काटकर हत्याकांड को अंजाम दिया गया। अगले दिन तलवार के नौकर हेमराज का शव उनके छत से बरामद हुआ। इसके बाद यह मामला बेहद पेंचीदा होता गया। आरुषि और हेमराज का मोबाइल गायब था। हत्या का मकसद क्या था। हथियार जिससे वारदात को अंजाम दिया गया वह गायब था और देखते-देखते यह मर्डर मिस्ट्री तब देश की सबसे बड़ी मर्डर मिस्ट्री बन गई। एक ही सवाल चारो ओर था कि कातिल कौन है?
यूपी पुलिस की जांच पर उठे सवाल
आरुषि की हत्या के बाद चूंकि घर से हेमराज गायब था इसलिए तत्काल उसी पर शक की सूई घूमी, लेकिन बाद में जब उसका शव तलवार के घर की छत से बरामद हुआ तो मामला फिर से उलझ गया। फिर पुलिस के लिए यह केस आसान नहीं रहा। यूपी सरकार ने पुलिस को टास्क फोर्स की मदद दी। इसके बाद तत्कालीन डीजीपी बृजलाल ने इस हत्याकांड को सुलझाने का दावा किया और राजेश तलवार को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस की थिअरी थी कि डॉक्टर तलवार और उनकी एक फैमिली फ्रेंड में संबंध थे और इसकी जानकारी आरुषि को थी। इस दौरान वह नौकर हेमराज से प्रगाढ़ संबंध में आ गई और यह बात तलवार को रास नहीं आई। उसने पहले हेमराज की हत्या की और फिर आरुषि की। लेकिन इस थिअरी पर तमाम सवाल उठे। इसके बाद तत्कालीन बीएसपी की सरकार ने मामले की जांच सीबीआई के हवाले कर दिया।
सीबीआई ने नौकरों को आरोपी बनाया और कहा था कि तलवार का रोल नहीं
सीबीआई ने मामले की छानबीन के दौरान घरेलू नौकरों पर शक जाहिर की। सीबीआई ने कहा कि वारदात को खुखरी जैसे हथियार से अंजाम दिया गया है और फिर तलवार के नौकर कृष्णा से पूछताछ हुई और एक महीने बाद 13 जून को उसे गिरफ्तार कर लिया गया। फिर सीबीआई ने एक के बाद एक बाकी नौकरी को भी गिरफ्तार किया। इसमें तलवार की दोस्त के नौकर राजकुमार और पड़ोसी के नौकर विजय मंडल को भी गिरफ्तार किया गया। इन तीनों नौकरों का साइंटिफिक टेस्ट हुआ यानी ब्रेन मैपिंग टेस्ट, लाइ डिटेक्टर टेस्ट और नार्को टेस्ट कराया गया। वारदात के 56वें दिन सीबीआई ने पहली बार दावा किया कि हत्याकांड में नौकरों का हाथ है और तलवार का रोल नहीं है। लेकिन साइंटिफिक सबूत के आधार पर सीबीआई ने तमाम हाथ पैर मारे, लेकिन नौकरी के खिलाफ पुख्ता सबूत नहीं मिले। चूंकि, केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है ऐसे में हत्या का मकसद, लास्ट सीन एविडेंस और हथियार की बरामदगी अहम थी, लेकिन इनमें सीबीआई को खास सफालता नहीं मिली और नौकरों को जमानत मिल गई।
सीबीआई ने दाखिल की थी क्लोजर रिपोर्ट, लेकिन कोर्ट ने पर्याप्त सबूत माना था और समन जारी किया
छानबीन के बाद सीबीआई ने तलवार दंपती पर संदेह जताया, लेकिन कहा कि चूंकि केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित है ऐसे में साक्ष्यों की कड़ियां तलवार दंपती के खिलाफ नहीं जुटती हैं और फिर सीबीआई ने मामले में स्पेशल कोर्ट के सामने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर दी और कहा कि मामले को बंद कर दिया जाए। लेकिन स्पेशल कोर्ट ने पेश तथ्यों के आधार पर कहा कि जो साक्ष्य हैं, वह पुख्ता हैं और मामले में तलवार दंपती को बतौर आरोपी समन जारी कर दिया। हालांकि, क्लोजर रिपोर्ट में सीबीआई ने शक की सूई तलवार दंपती की तरफ घुमाया था, पर पुख्ता सबूत नहीं होने की बात कही थी। वैसे सीबीआई की थिअरी खुद ही बदलती रही। यूपी पुलिस ने तलवार को आरोपी बनाया था, लेकिन सीबीआई ने उसे नकार दिया था और नौकरों को आरोपी बनाया। इसके बावजूद जब पुख्ता सबूत नहीं मिले तो तलवार दंपती पर शक जाहिर किया था।
हाई कोर्ट से बरी होने के बाद सवाल फिर कायम
निचली अदालत ने तलवार दंपती को आरुषि और हेमराज की हत्या में उम्रकैद की सजा सुनाई। तलवार दंपती ने हाई कोर्ट में चुनौती दी और हाई कोर्ट ने दोनों को बरी कर दिया। अदालत ने कहा कि परिस्थितियों और रिकॉर्ड में दर्ज साक्ष्यों के मुताबिक तलवार दंपती को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। हाई कोर्ट के फैसले के बाद यह बात साफ हो गई है कि आरुषि की हत्या में तलवार दंपती का हाथ नहीं था। ऐसे में अब सवाल यह है कि आखिर कातिल कौन है?
सीबीआई की थिअरी क्या कहती रही
-सीबीआई का दावा था कि कुछ ऐसी बातें हैं जो तलवार की संलिप्तता की ओर इशारा करती हैं। गुस्से में डॉ. राजेश तलवार ने इस हत्याकांड को अंजाम दिया था। ये गुस्सा एकाएक आया था और यूपी पुलिस की थिअरी भी यही है।
-गांधीनगर स्थित एफएसएल में टेस्ट से पहले तलवार दंपती ने बयान दिया था और कहा था कि रात को सोने से पहले वह आरुषि का कमरा बंद कर देते थे और चाबी नूपुर अपने पास रखती थीं। अंदर से आरुषि का कमरा खुल सकता था, लेकिन बाहर से नहीं, जबकि घटना के बाद सुबह आरुषि का कमरा खुला हुआ था और चाबी लॉबी में मिली थी। सीबीआई का दावा था कि तलवार दंपती यह नहीं बता पाए थे कि कमरा कैसे खुला। सीबीआई का कहना था कि इससे साफ है कि कमरा या तो आरुषि ने अंदर से खोला या फिर बाहर से चाबी से आरुषि के पैरेंट्स ने खोला, क्योंकि चाबी उन्हीं के पास थी।
-सीबीआई का दावा था कि आरुषि का गला तेज धारदार हथियार से किसी एक्सपर्ट के द्वारा काटा गया था और यह आरुषि के पैरेंट्स हो सकते हैं।
-सीबीआई का दावा था कि आरुषि के मोबाइल का तमाम डाटा डिलीट किया जा चुका था और यह कोई जानकार ही कर सकता था।
-सीबीआई का कहना था कि गोल्फ स्टिक के बारे में बाद में तलवार दंपती ने सीबीआई को बताया। सीबीआई का दावा है कि पहले गोल्फ स्टिक से मारा गया और फिर गला काटा गया था।
-जब नौकरानी आई तो दरवाजा बाहर से लॉक था और तब नूपुर ने घर से बाहर बालकनी से चाबी फेंकी थी ताकि नौकरानी घर में दाखिल हो पाए और नौकरानी के आने के दौरान उन्हें पता चला कि आरुषि की हत्या कर दी गई।
-सीबीआई का कहना था कि पुलिस मौके पर सवा सात बजे सुबह पहुंची और तब तलवार ने बताया कि हेमराज गायब है और उसने हत्या की है। सीबीआई का कहना था कि तलवार के दोस्तों ने कहा था कि छत जाने वाली सीढ़ियों पर खून के निशान हैं लेकिन दरवाजा बंद है। जब चाबी मांगी गई तो तलवार ने उसे अनसुना कर दिया। उस वक्त तलवार ने पुलिस से कहा था कि वह टाइम खराब न करें और हेमराज को तलाशें। यूपी पुलिस ने 2 दिनों बाद छत का दरवाजा तोड़ा और उन्हें हेमराज का शव मिला। तब तलवार ने शव को पहचानने से इनकार कर दिया था।
-सीबीआई का दावा था कि यह तमाम तथ्य राजेश तलवार के संलिप्तता का इशारा करते हैं, लेकिन सीबीआई ने क्लोजर रिपोर्ट में यह कहा कि यह तमाम तथ्य केस चलाने के लिए पर्याप्त नहीं है और केस बंद करने की गुहार लगाई थी। लेकिन अदालत ने इन तथ्यों को केस चलाने के लिए पर्याप्त माना और क्लोजर रिपोर्ट को चार्जशीट में तब्दील कर दिया और बतौर आरोपी तलवार दंपती को समन जारी कर दिया था।
तलवार दंपती ने सीबीआई की थिअरी पर हाई कोर्ट के सामने उठाए थे सवाल
-तलवार दंपती का दावा था कि सीबीआई की कहानी यह है कि आरुषि और हेमराज आपत्तिजनक अवस्था में थे और जब तलवार दंपती ने इसे देखा तो एकाएक गुस्से में पहले गोल्फ स्टिक से दोनों के सिर पर वार किया और फिर ब्लेड से गला काट दिया। इसके बाद हेमराज की बॉडी छत पर घसीटकर ले गए। तलवार का कहना था कि अगर ऐसा ही हुआ कि कत्ल नीचे कमरे में हुआ तो कमरे में हेमराज के खून के धब्बे मिलने चाहिए थे और सीबीआई को वह धब्बे क्यों बरामद नहीं हुए।
-सीबीआई ने आरुषि के बेड से लेकर तमाम जगह सैंपल उठाए लेकिन हेमराज के खून के निशान क्यों नहीं दिखे। सीबीआई का दावा था कि दोनों आपत्तिजनक अवस्था में थे तो ऐसे में मौके पर सीबीआई को हेमराज के शरीर का कोई सैंपल क्यों नहीं मिला। आरुषि का सैंपल भी नेगेटिव पाया गया था।
-सीबीआई के गोल्फ स्टिक की थिअरी पर भी तलवार दंपती ने सवाल उठाया था और कहा था कि पहले सीबीआई ने कहा कि स्टिक नंबर 5 से वार हुआ था, लेकिन बाद में कहा कि स्टिक नंबर 4 से वार किया गया था।
-तलवार दंपती का कहना था कि सीबीआई की चार्जशीट में इस बात का जिक्र नहीं है कि कृष्णा के तकिए से हेमराज के खून के निशान कैसे मिले, जबकि शुरुआती जांच में ये बातें आई थीं। सीबीआई ने इस मामले में नया तर्क गढ़ा कि जब जांच के लिए तकिए को भेजा गया था तो तकिए की अदला-बदली हो गई थी।
-कृष्णा के तकिए पर हेमराज का खून मिलना एक अलग ही ऐंगल बताती है और यह पुख्ता सबूत था, लेकिन सीबीआई ने इसे नजरअंदाज कर दिया। साइंटिफिक टेस्ट में नौकरों के खिलाफ पॉजिटिव रिपोर्ट थी, लेकिन सीबीआई ने कहा कि सबूत नहीं है।
-सीबीआई के पास इस बात के पुख्ता सबूत नहीं है कि हेमराज और आरुषि आपत्तिजनक अवस्था में थे। दोनों का कत्ल कमरे में हुआ और फिर हेमराज के शव को घसीटकर छत पर ले जाया गया। तलवार का दावा था कि केस परिस्थितिजन्य साक्ष्यों पर आधारित था और साक्ष्यों की कड़ियां टूट रही हैं।