प्रेक्षाध्यान योग साधना में समर्पण के 20 साल

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मुंबई: योग की ही तरह जैन धर्म मे प्रेक्षा ध्यान एक ऐसा अचूक मंत्र है जिसे जिसने भी जीवन में अपनाया उसका जीवन निरोगी बन गया। तेरापंथ धर्म संघ के आचार्यो ने भी इसे जीवित करने की काफी कोशिश भी की और उसमें सफल भी रहे पर। आम जन मानस के बीच इसे पहुचाने का काम मुम्बई के कांदिवली में रहने वाले पारस दुग्गड़ ने किया है। उनके इसे पहल की हाल ही में 20 साल पूरे हुए है। पारस दुग्गड़ का यह कार्य निःस्वार्थ भाव से आम जन मानस भारत वर्ष निरोगी जीवन जिये इस संकल्प के साथ प्रेक्षाध्यान केंद्र की शुरुआत किया अब दो डेस्क हो चुके है इस पहल को। इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि जैन समाज के लोगों के साथ साथ दूसरे समाज के लोग भी इससे भारी संख्या में जुड़ रहे है। पारस दुगड़ अपने द्वारा प्रेक्षा ध्यान की मुद्राएं कर उसकी लोकप्रियता बढ़ाने के उद्देश्य के साथ यूट्यूब चैनल्स भी चला रहे हैं।
पारस दुग्गड़ के साथ कंधे से कंधा मिलाकर उनकी पत्नी विमला दुग्गड़ भी इस मानव सेवा के अभियान को लगातार आगे बढ़ा रही हैं। इस पूरे अभियान में एक रुपया भी दुग्गड़ दंपत्ति कमाने की इच्छा नही रखते है ।