अयोध्या मामले में कोर्ट में दोनों पक्षों में हुई जमकर हुई बहस, कोर्ट ने दिया 12 सप्ताह का समय

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नई दिल्ली। अयोध्या का मामला देश का सबसे धार्मिक मामला हैं इस मामले को लेकर पूरे देश की निगाहें लगी हुई है। कई दिनों के बाद 11 अगस्त से इस मामले की सुनवाई शुरु की। शुक्रवार को अयोध्या मामले की सुनवाई कर रहे कोर्ट का नजारा अलग था।सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड, मुहम्मद हाशिम और निर्मोही अखाड़ा मामला तैयार नहीं होने के आधार पर जल्द सुनवाई का विरोध कर रहे थे।खचाखच भरी अदालत में विशेष पीठ को अपनी दलीलों से सहमत करने के लिए दोनों पक्षों के बीच वकीलों की आवाज तेज होने लगी। शुक्रवार को मामले की पहली सुनवाई तो दोपहर दो बजे शुरू होनी थी। लेकिन, डेढ़ बजे ही अदालत खचाखच भर गई। लोग लंच टाइम में भी जमे रहे। उन्हें लग रहा था कि अगर बाहर चले गए तो भीड़ में फिर नहीं घुस पाएंगे। ठीक दो बजे न्यायमूर्ति दीपक मिश्रा, अशोक भूषण और अब्दुल नजीर ने कोर्ट में प्रवेश किया।
मामले की सुनवाई की शुरुआत उत्तर प्रदेश की ओर से पेश एएसजी तुषार मेहता ने कहा कि पहले हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ दाखिल अपीलों पर सुनवाई हो। उसके बाद बाकी अर्जियां सुनी जाएं। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि कोर्ट को जल्दी सुनवाई की तिथि तय करनी चाहिए। लेकिन, सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड के वकील अनूप जार्ज चौधरी,कपिल सिब्बल और राजीव धवन ने इसका विरोध करते हुए कहा कि अभी दस्तावेजों का अनुवाद नहीं हुआ है। संस्कृत, हिंदी, उर्दू, पाली, फारसी, गुरुमुखी समेत आठ भाषाओं में इसके दस्तावेज हैं। इन वकीलों की तेज आवाज के बीच रामलला के वकील सीएस वैद्यनाथन और यूपी के मेहता ने सुझाव दिया कि जो पक्षकार जिस दस्तावेज का हवाला देना चाहता है, वही उसका अनुवाद कराए। पीठ को सुझाव ठीक लगा।लेकिन,चौधरी का कहना था कि दूसरा पक्ष सवाल उठाएगा तो क्या होगा।
इसके बाद पीठ ने कहा कि अगर ऐसा हुआ तो कोर्ट उस अनुवाद को विशेषज्ञ के पास भेजेगा। इस बीच तुषार मेहता ने कहा कि मुकदमा 1949 में शुरू हुआ और अब 2017 है। और हम अभी दस्तावेजों के अनुवाद पर बहस कर रहे हैं। जब कोर्ट ने पूछा कि अनुवाद में कितना समय लगेगा,तो रामलला की ओर से सिर्फ चार सप्ताह मांगा गया। इसके बाद सुन्नी बोर्ड ने चार महीने का समय मांगा। निर्मोही अखाड़े के वकील सुशील जैन ने कहा कि वे अभी अंदाज से भी नहीं बता सकते कि कितना समय लगेगा। पीठ ने इस दलील पर एतराज जताया और पक्षकारों को अनुवाद के लिए 12 सप्ताह का समय दिया।